विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे 120 सरेंडर नक्सली, झीरम हमले का मास्टरमाइंड चैतू भी शामिल; किसानों से जुड़ा मुद्दा उठा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को एक अनोखा और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब 120 सरेंडर नक्सली सदन की कार्यवाही देखने पहुंचे।
माओवादी विचारधारा छोड़ने के बाद पहली बार ये पूर्व नक्सली लोकतांत्रिक व्यवस्था के केंद्र विधानसभा की कार्यवाही के साक्षी बने। इनमें 1 करोड़ का इनामी और सेंट्रल कमेटी का पूर्व सदस्य सतीश उर्फ रूपेश भी शामिल था।
वहीं, 2013 के झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड और 25 लाख का इनामी चैतू भी विधानसभा पहुंचा। चैतू ने तीन महीने पहले जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था।
विधानसभा परिसर पहुंचने पर सभी सरेंडर नक्सलियों की कड़ी सुरक्षा जांच की गई, इसके बाद उन्हें दर्शक दीर्घा में बैठने की अनुमति दी गई। इससे पहले गुरुवार रात ये सभी डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर आयोजित रात्रिभोज में शामिल हुए थे, जहां रेड कार्पेट बिछाकर और फूलों से उनका स्वागत किया गया।
सत्र के दौरान सदन में विधायक पुन्नूलाल मोहले ने किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने फसल उत्पादन, प्रशिक्षण, बीज वितरण और खाद के मूल्यांकन को लेकर सवाल किए।
इसके अलावा सदन में आश्रम-छात्रावासों और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ओपी चौधरी और राजेश अग्रवाल के विभागों से जुड़े सवाल भी प्रश्नकाल में उठाए गए।
सरेंडर नक्सलियों की विधानसभा यात्रा को मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो शांति और विकास की राह को मजबूत करता है।

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