भारत में एंटी-बायोटिक दवाओं का ज्यादा सेवन बन रहा खतरा, स्टडी में आया सामने, स्वास्थ्य मंत्री ने जताई चिंता
देश में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा होने की आशंका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त की है। हैदराबाद स्थित एआईजी हॉस्पिटल्स द्वारा कराए गए एक वैश्विक अध्ययन में पाया गया है कि भारत “सुपरबग विस्फोट” की स्थिति का सामना कर रहा है और अस्पतालों में आने वाले 83 प्रतिशत मरीज पहले से ही दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया लेकर पहुंच रहे हैं।
रोगाणुरोधी जागरूकता सप्ताह के दौरान द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन में स्पष्ट कहा गया है कि भारत में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटिमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस, AMR) के खिलाफ लड़ाई अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल स्टोर्स में बिना पर्चे के मिलने वाली दवाएं, एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग और डेयरी व पोल्ट्री जैसे क्षेत्रों में दवाओं का अनियंत्रित प्रयोग इस संकट को और गंभीर बना रहा है।
भारतीय मरीज अधिक जोखिम में, स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े
केंद्र ने जताई गंभीर चिंता, राष्ट्रीय कार्य योजना का दूसरा संस्करण लॉन्च
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग पर चिंता जताते हुए इसे देश के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बताया। उन्होंने दिल्ली में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (2025-29) पर राष्ट्रीय कार्य योजना के दूसरे संस्करण की शुरुआत की और कहा कि एएमआर का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस दिशा में चर्चा वर्ष 2010 में शुरू हुई और 2017 में पहली राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि एएमआर ऑपरेशन, कैंसर उपचार और अन्य गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों में गंभीर जोखिम पैदा कर रही है। उनका कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस वैश्विक चुनौती से निपटने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है, क्योंकि एएमआर महामारी की तरह एशिया और अफ्रीका के कई विकासशील देशों को प्रभावित कर रहा है।
अध्ययन और विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एंटीबायोटिक दवाओं के नियंत्रण, जिम्मेदार उपयोग और जागरूकता पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

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