मिस एण्ड मास्टर जीनियस में खुशबू साहू, शेख आतिफ, खुशबू विश्वकर्मा व लक्ष्यवीर वराडे ने जीता खिताब

मिस एण्ड मास्टर जीनियस में खुशबू साहू, शेख आतिफ, खुशबू विश्वकर्मा व लक्ष्यवीर वराडे ने जीता खिताब

रायपुर। शंकरनगर स्थित विम्तारा हॉल में बुधवार को मिस एण्ड मास्टर जीनियस कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें कक्षा 6 से 9 के ग्रुप में मिस जीनियस का खिताब पीजी उमाटे स्कूल की खुशबू साहू एवं मास्टर जीनियस का खिताब जेडी डागा स्कूल के शेख आतिफ ने जीता। कक्षा 9 से 12 के द्वितीय ग्रुप में मिस जीनियस का पुरस्कार कल्याण पब्लिक स्कूल की खुशबू विश्वकर्मा एवं मास्टर जीनियस जे एन पांडे स्कूल के लक्ष्यवीर वराडे ने जीता। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, कार्यक्रम प्रमुख अमित चिमनानी,कार्यक्रम निदेशक अनिल जोतसिंघानी और पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत अध्यक्ष महेश दरयानी, पार्षद डॉ. अनामिका सिंह, जिला कोषाध्यक्ष पन्ना दुबे, अमर चंदनानी, डॉ. जवाहर सूर्यशेट्टी उपस्थित थे। अतिथि वक्ता के रुप में नेशनल वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर अलक्शेंद्र मोघरे, वैदिक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन आनंद कुमार अग्रवाल और दावरा युनिवर्सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चिन्मय दावरा ने बच्चों एवं अभिभावकों को प्रेरणादायक मार्गदर्शन प्रदान किया और बच्चों को आगे बढऩे के लिए उत्साहित और प्रेरित किया ।

कैबिनेट मंत्री वर्मा ने कहा कि आप सभी बच्चे अपने संकल्प के प्रति जिद्दी रहें। आपका संकल्प जब तक पूरा न हो जाए, आप सब उसके लिए सतत प्रयासरत रहें। वर्मा ने उन सभी अभिभावकों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया, जो तमाम प्रतिकूलताओं से संघर्ष करके अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और प्रतिभा विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए अभिभावक परिस्थितियों के अनुरूप समझौता भी कर रहे हैं। बच्चों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे अपने माता-पिता के परिश्रम और संघर्ष को जाया न होने दें। सभी बच्चे एक आदर्श- नागरिक बनकर राज्य और राष्ट्र का नाम ऊँचा करें।

कार्यक्रम प्रमुख अमित चिमनानी ने कहा कि बच्चों को उन सभी महापुरुषों व लोगों की जीवनी को पढ़कर आत्मसात करना चाहिए जो लोग संघर्षों और अभावों को मात देकर सफलता की कीर्ति-कथा के नायक बने हैं। इससे बच्चों को यह अनुभव हो सकेगा कि सफलता कैसे हासिल होती है ? सफलता हासिल करने के लिए जिस मार्ग पर हम चलते हैं, उस पर अनेक मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। श्री चिमनानी ने कहा कि आज तक जितने भी लोग सफल हुए हैं उनका रास्ता सुगम, नहीं था, लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कई बार ऐसा देखने में आता है कि बच्चे केवल अपनी मार्कशीट को ही अपनी योग्यता का मापदण्ड मानते हैं, लेकिन जो लोग शुरू में कमजोर रहे, उन्होंने भी बाद में अच्छा प्रदर्शन किया। इसलिए शुरुआती कमजोरियों से निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वे लक्ष्य तय करें कि राज्य व राष्ट्र के लिए वे क्या कर सकते हैं? सन् 2047 तक का यह समय अमृत काल की तरह है, जिसमें युवाओं के पास अवसरों की कमी नहीं है और उन्हें राष्ट्र के विकसित राष्ट्र, विकसित प्रदेश के लक्ष्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित निश्चित करना है।