धान खरीदी में सरकार की मनमानी रकबा संशोधन से किसान परेशान-आम आदमी पार्टी
धान खरीदी में सरकार की मनमानी रकबा संशोधन से किसान परेशान-आम आदमी पार्टी
धान खरीदी के दौरान तौल की मात्रा 40 किलो 600 ग्राम से ज्यादा ना ली जाये-उत्तम जायसवाल, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष, आप
रायपुर। आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने कहा कि 15 नवम्बर से प्रदेश में धान खरीदी चल रही है, छत्तीसगढ़ में किसान धान की फसल उत्पादन कर और बिक्री कर फसल बचत की राशि पर ही अपना परिवार का भरण पोषण करता है। लेकिन धान खरीदी को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिख रही है। न समय पर किसानों को टोकन मिल रहा है और न ही पूरे रकबे के हिसाब से तौलाई हो रही है। गिरदावरी और अनावरी रिपोर्ट का हवाला देकर कम धान खरीदा जा रहा है। उन्होंने बताया कि बलौदाबाजार में कल ही समिति द्वारा जितना कर्ज किसान ने लिया उतना धान तौलाकर बाकी धान कलर ख़राब बोलकर वापिस कर दिया गया, ये कैसी खरीदी हो रही है। जिस पर आम आदमी पार्टी के बलौदाबाजार जिलाध्यक्ष ने धरना दिया उसके बावजूद अभी तक उस किसान का पूरा धान नहीं ख़रीदा गया है। सरकार घोषित नीति प्रति एकड़ 21 क्विंटल के हिसाब से खरीदी नहीं कर रही है।
प्रदेश महासचिव ( मीडिया, सोशल मीडिया प्रभारी,मुख्य प्रवक्ता ) सूरज उपाध्याय ने कहा कि धान बेचने के दौरान किसानों के कर्ज को किसानों की सहमति से ही काटा जाए। धान खरीदी के दौरान तौल की मात्रा 600 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त ना हो जुट बोरे में यदि तौल हो रहा है। सोसाइटी में पिछले वर्ष कितने किसानों ने धान बेचा था इस वर्ष कितने किसान बेच पाएंगे व पिछले साल कुल कितने रकबे में खरीद पूरे सोसाइटी में हुई थी इस कितने रकबे में खरीद होगी अगर रकबा कम हुआ तो क्यों कम हुआ। जिन किसानों का रकबा संशोधन या किसान पोर्टल में पंजीयन नहीं हुआ है उसकी क्या स्थिति है। धान तौलाई का ढेर फोड़ने का और गाड़ी से उतारने का पैसा किसानों से तो नहीं लिया जा रहा है। धान की क्वालिटी के नाम पर अवैध वसूली तो नहीं हो रही।
प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा झा, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन सिंह, रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान और रायपुर जिलाध्यक्ष नवनीत नन्दे ने संयुक्त रूप से कहा कि अभी जब सभी किसानों की धान कट चुका है, लेकिन रिकार्ड में जमीन कम दिखाने से किसान अपना पूरा धान बेच नहीं पा रहे हैं, सरकार और प्रशासन की लापरवाही का नुकसान किसानों को हो रहा है। प्रशासन के रवैए से लग रहा है कि यह सरकार किसानों धान ना ही 3100 रूपये से खरीदना चाहती है और ना ही किसानों का पूरा धान खरीदना चाहती है इसलिए अनेक बहाने बना रही है।

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