परिवार में लोग लगातार बीमार पड़ते थे, तब समझ आया कि रसायनों के उपयोग से उगाई जा रही सब्जियां ही हमारी सेहत बिगाड़ रही

परिवार में लोग लगातार बीमार पड़ते थे, तब समझ आया कि रसायनों के उपयोग से उगाई जा रही सब्जियां ही हमारी सेहत बिगाड़ रही

परिवार में लोग लगातार बीमार पड़ते थे, तब समझ आया कि रसायनों के उपयोग से उगाई जा रही सब्जियां ही हमारी सेहत बिगाड़ रही हैं। ऐसे में गोबर खाद और प्राकृतिक तरीकों से खेती की शुरुआत की और यह प्रयोग सफल रहा।

रायगढ़ जिले के खरसिया ब्लॉक के कटौद गांव के रहने वाले किसान नारायण गबेल ने पांच साल पहले जैविक खेती की शुरुआत की। आज वे न सिर्फ पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं, बल्कि हर साल 6 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित कर रहे है

परिवार में लगातार किसी न किसी सदस्य के बीमार पड़ने के साथ ही कोरोना महामारी के समय जब बाजार बंद हुए और खाद-बीज की किल्लत बढ़ी, तो नारायण गबेल ने अपनी पुरानी खेती पद्धति पर पुनर्विचार किया। उन्होंने गाय के गोबर से खाद बनाना शुरू किया।

खेत में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया। धीरे-धीरे जब उत्पादन बढ़ा, तो उन्होंने व्यवसायिक सब्जी उत्पादन को अपनाया। प्राकृतिक खेती और नवाचारों के लिए उनकी पहचान अब पूरे क्षेत्र में बन चुकी है। वे छत्तीसगढ़ शासन से उन्नतिशील किसान पुरस्कार से सम्मानित किसान हैं।

नारायण गबेल आज टमाटर, भिंडी, बैंगन, लौकी, बरबटी, पत्ता गोभी, फूल गोभी, अरहर, राजमा, आलू सहित कई मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। प्राकृतिक खेती से सब्जियों का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होने के कारण स्थानीय बाजार में हमेशा उनकी भारी मांग रहती है। यही वजह है कि वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

नारायण गबेल बताते हैं कि वे सब्जियों की खेती के अलावा फूलों की खेती भी करते हैं। इस साल उन्होंने 6 हजार गेंदे के पौधे लगाए थे। इससे एक सीजन में उन्हें करीब 3 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। किसान ने गेंदे की खेती की शुरुआत जून माह में की थी।

खेत को पूरी तरह गोबर खाद और जैविक मिश्रण से तैयार किया, जिससे पौधों में तेज़ी से वृद्धि हुई। सीजन शुरू होने के साथ त्योहारों में गेंदे के फूलों की मांग बढ़ी, जिससे उन्हें लगातार बढ़िया दाम मिलते रहे।

किसान नारायण बताते हैं कि गोबर, कंपोस्ट और अन्य प्राकृतिक खाद से तैयार फसल न केवल स्वास्थ्यवर्धक है, बल्कि इसकी बाजार में मांग भी बहुत ज्यादा है। नारायण गबेल जमीन में सिर्फ जैविक खाद का उपयोग करते हैं। इसलिए सब्जियों की मांग अधिक होती है। ग्राहक सीधे घर तक आकर खरीदकर ले जाते हैं।

उनका कहना है कि रासायनिक उर्वरकों की बजाय प्राकृतिक खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखता है और लंबी अवधि में फसल की गुणवत्ता और स्वाद में सुधार करता है। इसके अलावा जैविक फसलों के लिए स्थानीय और शहरी दोनों बाजारों में कीमत अधिक मिलती है।

किसान नारायण पटेल ने अपने खेतों में व्यवसायिक दृष्टि से आलू 50 डिसमिल, मटर 20 डिसमिल, गोभी 30 डिसमिल, राजमा 30 डिसमिल, टमाटर 50 डिसमिल, सरसों 50 डिसमिल, गेहूं 1 एकड़, करेला 30 डिसमिल, चना 50 डिसमिल और लौकी 50 डिसमिल में लगाया है।

ये सभी फसलें बाजार की मांग और लाभ को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं और किसानों के लिए नए व्यवसायिक मॉडल के रूप में उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। इन प्रगतिशील किसान से और जानें… 9753787333

आप भी किसान हैं और खेती में ऐसे नवाचार किए हैं जो सभी किसान भाइयों के लिए उपयोगी हैं, तो डिटेल व फोटो-वीडियो हमें अपने नाम-पते के साथ 9755195863 पर सिर्फ वॉट्सऐप करें। ध्यान रखें, ये नवाचार किसी भी मीडिया में न आए हों।