आंजनेय यूनिवर्सिटी : युवा प्रतिभाओं ने मंच पर उकेरी मोक्ष की यात्रा, नाटक ने छोड़ी गहरी छाप

रायपुर। आंजनेय यूनिवर्सिटी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक “बैकुंठ द्वार से मोक्ष तक” ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया। इस नाट्य प्रस्तुति में जीवन, मृत्यु और मोक्ष जैसे गूढ़ विषयों को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक दृश्य ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हुए यह संदेश दिया कि सच्चे कर्म और आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलकर ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। चांसलर श्री अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि समग्र रूप से यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि दर्शकों के मन में गहन आध्यात्मिक चिंतन की प्रेरणा भी छोड़ गया। मुख्य अतिथि श्री योगेश अग्रवाल ने कहा कि ‘बैकुंठ द्वार से मोक्ष तक’ नाट्य प्रस्तुती समाज को सही दिशा दिखाने का सशक्त माध्यम हैं। इस नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने जीवन, कर्म और मोक्ष जैसे गहन विषयों को जिस संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ मंच पर प्रस्तुत किया, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को इस प्रकार आत्मसात कर अभिव्यक्त करती है, तो यह हमारे समाज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। विशिष्ट अतिथि श्री सुभाष मिश्र ने कहा कि इस प्रकार की नाट्य प्रस्तुतियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि समाज को गहरी सीख देने का सशक्त मंच भी बनती हैं। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘बैकुंठ द्वार से मोक्ष तक’ नाटक ने भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक चिंतन को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी जब इस तरह के विषयों को समझकर मंच पर उतारती है, तो यह हमारे संस्कारों और परंपराओं के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाता है।

 

नाटक की लेखिका और निर्देशिका रचना गोयल ने कहा कि नाटक में दर्शाया गया कि किस प्रकार जय और विजय, जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे, एक श्राप के कारण तीन जन्मों तक पृथ्वी पर हरि के शत्रु के रूप में जन्म लेने को बाध्य हुए। कथा के प्रत्येक चरण में अधर्म का विस्तार होता है और तब धर्म की रक्षा हेतु स्वयं भगवान विष्णु विभिन्न अवतार धारण कर पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। विद्यार्थियों ने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों वराह, नरसिंह, राम और कृष्ण को सजीव अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रत्येक दृश्य में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अंततः सत्य, धर्म और भक्ति की ही विजय होती है। नाटक की प्रस्तुति में संवाद, संगीत, वेशभूषा और मंच सज्जा का समन्वय दर्शकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान कर गया।

इस अवसर पर प्रो-चांसलर श्रीमती दिव्या अग्रवाल, डायरेक्टर जनरल डॉ. बी. सी. जैन, कुलपति डॉ. टी. रामाराव, निदेशक डॉ. जयेंद्र नारंग, निदेशक (अकादमिक) डॉ. संध्या वर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. रुपाली चौधरी सहित विश्वविद्यालय के सभी डीन, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।