सोनिया गांधी वोटर लिस्ट मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला, निचली अदालत का आदेश रद्द
नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मतदाता सूची से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता की FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था। अब मामले पर निचली अदालत को नए सिरे से विचार करना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सोनिया गांधी के नाम के 1980 में मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि उनका नाम भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज किया गया था। सोनिया गांधी ने 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल की थी, जबकि शिकायत में उनके नाम के 1980 में मतदाता सूची में दर्ज होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच की मांग की थी। हालांकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में शिकायत को खारिज करते हुए जांच/FIR का आदेश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने क्या कहा
मामले की सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि निचली अदालत के आदेश में मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं और कारणों की पर्याप्त चर्चा नहीं की गई थी।सेशन कोर्ट के फैसले के बाद अब शिकायत पर निचली अदालत को दोबारा विचार कर नया आदेश देना होगा।
सोनिया गांधी ने क्या कहा
सोनिया गांधी की ओर से इस शिकायत का विरोध किया गया है। उनके पक्ष ने पहले अदालत में दलील दी थी कि शिकायत राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसका उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी अन्य मकसद के लिए करना है। वहीं शिकायतकर्ता का दावा है कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होनी चाहिए और इसी आधार पर FIR दर्ज कर जांच की मांग की गई है।
अब आगे क्या होगा?
राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में आगे की कार्रवाई अब मजिस्ट्रेट कोर्ट में होगी। निचली अदालत उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद नया आदेश जारी करेगी।हालांकि, सेशन कोर्ट के इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। फिलहाल अदालत ने निचली अदालत के पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का रास्ता खोला है।

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