जशपुर से गूंजा 'जय जगन्नाथ' का जयघोष : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निभाई गजपति महाराजा की परंपरा, स्वर्ण झाड़ू से किया 'छेरा पहरा', हजारों श्रद्धालुओं संग खींचा भगवान जगन्नाथ का रथ, 1942 से चली आ रही दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा में आस्था, संस्कृति और सुशासन का दिया संदेश

जशपुर से गूंजा 'जय जगन्नाथ' का जयघोष : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निभाई गजपति महाराजा की परंपरा, स्वर्ण झाड़ू से किया 'छेरा पहरा', हजारों श्रद्धालुओं संग खींचा भगवान जगन्नाथ का रथ, 1942 से चली आ रही दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा में आस्था, संस्कृति और सुशासन का दिया संदेश

जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ऐतिहासिक ग्राम दोकड़ा गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में आयोजित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गजपति महाराजा की परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से 'छेरा पहरा' की पावन परंपरा निभाई और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव कर सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर भव्य रथयात्रा का शुभारंभ किया। पूरे दोकड़ा में "जय जगन्नाथ" के जयघोष, शंखध्वनि, हरिनाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

1942 से जीवित है दोकड़ा की गौरवशाली परंपरा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और जनआस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 1942 से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था को नई ऊर्जा दे रही है। जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और वर्ष 2025 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित की गई है। उन्होंने इस गौरवशाली परंपरा में गजपति महाराजा की भूमिका निभाने का अवसर देने के लिए दोकड़ावासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ और भगवान जगन्नाथ का सदियों पुराना आध्यात्मिक संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्री जगन्नाथ से गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि देवभोग का चावल आज भी पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते का जीवंत प्रमाण है।

आस्था के मंच से विकास और सुशासन का संदेश

रथयात्रा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की गारंटी के अनुरूप प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्रा का लाभ मिला है।

उन्होंने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरचार्ज माफी योजना की अवधि तीन माह बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का चौबीसों घंटे समाधान किया जा रहा है। वहीं अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में 520 से अधिक शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रेल और मेडिकल कॉलेज से बदलेगी जशपुर की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर जिले के विकास को नई गति देने के लिए धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। इसके साथ ही जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।

भक्ति, संस्कृति और लोक परंपरा का विराट संगम

रथयात्रा में ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने भजन और हरिनाम संकीर्तन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के बीच महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के जयघोष के साथ रथयात्रा में शामिल हुए। पूरे दोकड़ा में आस्था, संस्कृति और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, श्री जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।