जशपुर जिला अस्पताल में मौत से जंग जीत गया 55 वर्षीय मरीज, आंत में छेद और सेप्टिक शॉक के बीच डॉक्टरों ने की जटिल सर्जरी : हालात थे बेहद नाजुक, कई बार गिरा ब्लड प्रेशर,सर्जरी के बाद ICU में रखा गया, उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मरीज

जशपुर जिला अस्पताल में मौत से जंग जीत गया 55 वर्षीय मरीज, आंत में छेद और सेप्टिक शॉक के बीच डॉक्टरों ने की जटिल सर्जरी : हालात थे बेहद नाजुक, कई बार गिरा ब्लड प्रेशर,सर्जरी के बाद ICU में रखा गया, उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मरीज

जशपुरनगर, 11 अगस्त 2026। जिला चिकित्सालय जशपुर में चिकित्सकों की टीम ने एक बार फिर गंभीर मरीज के इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है। आंत में छेद, पेट में गंभीर संक्रमण और सेप्टिक शॉक जैसी जानलेवा स्थिति से जूझ रहे 55 वर्षीय मरीज की जटिल आपातकालीन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि उसका रक्तचाप काफी नीचे जा चुका था और किडनी समेत शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों के प्रभावित होने का खतरा बना हुआ था। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में सर्जरी, एनेस्थीसिया और मेडिसिन विशेषज्ञों की टीम ने बेहतर समन्वय के साथ मरीज का उपचार किया। उपचार के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ और उसे स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पेट दर्द और उल्टी के साथ पहुंचा था अस्पताल

मरीज को 25 जुलाई 2026 की रात करीब 9 बजे जिला चिकित्सालय के आकस्मिक चिकित्सा विभाग में गंभीर हालत में लाया गया था। उसे तेज पेट दर्द, पेट फूलने, उल्टी तथा मल और गैस का निष्कासन नहीं होने की शिकायत थी।

चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच के बाद पता चला कि आंत में छेद हो गया है, जिसके कारण पेट के भीतर गंभीर संक्रमण फैल चुका था। संक्रमण बढ़ने के कारण मरीज का रक्तचाप काफी कम हो गया था और स्थिति सेप्टिक शॉक तक पहुंच चुकी थी।

नाजुक हालत में तत्काल सर्जरी का फैसला

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल विशेषज्ञ परामर्श के बाद आपातकालीन शल्यक्रिया का निर्णय लिया। परिजनों को बीमारी की गंभीरता, ऑपरेशन और एनेस्थीसिया से जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी दी गई। सहमति मिलने के बाद जिला चिकित्सालय में ही तत्काल सर्जरी शुरू की गई।

ऑपरेशन के दौरान मरीज का रक्तचाप कई बार काफी नीचे चला गया। ऐसी स्थिति में एनेस्थीसिया टीम ने विशेषज्ञ प्रबंधन के साथ आवश्यक दवाओं का उपयोग कर रक्तचाप नियंत्रित रखा। चिकित्सकों की टीम ने लगातार मरीज की स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए आवश्यक उपचारात्मक कदम उठाए और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।

सर्जरी के बाद ICU में रखकर हुई लगातार निगरानी

ऑपरेशन के बाद मरीज को गहन चिकित्सा इकाई यानी ICU में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा गया। गंभीर संक्रमण और लंबे समय तक निम्न रक्तचाप के कारण कुछ समय तक रक्तचाप बनाए रखने वाली दवाओं की आवश्यकता पड़ी।

चिकित्सकों, एनेस्थीसिया टीम, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की लगातार देखभाल के बीच मरीज के रक्तचाप में धीरे-धीरे सुधार हुआ। स्थिति बेहतर होने के साथ रक्तचाप बनाए रखने वाली दवाएं भी क्रमशः बंद कर दी गईं। संक्रमण और उससे जुड़ी अन्य जटिलताओं का भी सफल उपचार किया गया।

सर्जरी, एनेस्थीसिया और मेडिसिन टीम का रहा अहम योगदान

इस चुनौतीपूर्ण आपातकालीन सर्जरी में डॉ. गौरव हरदहा एवं डॉ. भूपेश भगत (सर्जरी), डॉ. आकाश कुजूर (एनेस्थीसिया), डॉ. एस.एल. सिद्धार्थ एवं डॉ. दीपांशु भोय (मेडिसिन) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।तीनों विशेषज्ञ सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल, समय पर निर्णय और लगातार निगरानी ने मरीज के उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वस्थ होकर घर लौटा मरीज, जिला अस्पताल की क्षमता को मिली मजबूती

उपचार के बाद मरीज की सामान्य स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। वर्तमान में उसकी हालत संतोषजनक है और उसे रक्तचाप बढ़ाने वाली किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श, दवा और अनुवर्ती जांच की सलाह के साथ मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

यह सफलता इस बात को रेखांकित करती है कि समय पर बीमारी की पहचान, त्वरित चिकित्सकीय निर्णय, विशेषज्ञ सर्जरी एवं एनेस्थीसिया सेवाएं, मेडिसिन विशेषज्ञों का समन्वय, ICU में सतत निगरानी और स्वास्थ्यकर्मियों की समर्पित टीम के माध्यम से गंभीर एवं उच्च जोखिम वाले मरीजों का उपचार जिला स्तर पर भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

जिला चिकित्सालय जशपुर की यह उपलब्धि गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।