“नक्सल मुक्त बस्तर से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ तक : विष्णु सुशासन मॉडल के साथ बंदूक से भरोसे और विकास की ओर बढ़ता बस्तर,मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का नारायणपुर दौरा बना विकास,विश्वास और बदलाव का बड़ा संदेश”

“नक्सल मुक्त बस्तर से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ तक : विष्णु सुशासन मॉडल के साथ बंदूक से भरोसे और विकास की ओर बढ़ता बस्तर,मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का नारायणपुर दौरा बना विकास,विश्वास और बदलाव का बड़ा संदेश”

विशेष लेख (प्रशांत सहाय की कलम से)

शिक्षा,महिला सशक्तिकरण,पुनर्वास,सुरक्षा और जनभागीदारी से बदलती नई तस्वीर

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जैसे क्षेत्र लंबे समय तक सुरक्षा, पहुंच और विकास की चुनौतियों के कारण चर्चा में रहे हैं। लेकिन वर्तमान समय में यहां बदलाव का जो स्वर उभर रहा है, वह केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि शासन की पहुंच, जनविश्वास और सामाजिक परिवर्तन के व्यापक मॉडल की ओर संकेत करता है।

इसी परिप्रेक्ष्य में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का नारायणपुर प्रवास केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर देखने और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है।

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत “विष्णु सुशासन” की अवधारणा का केंद्र अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच, संवेदनशील प्रशासन, त्वरित निर्णय और जनभागीदारी को माना जा रहा है। नारायणपुर प्रवास के विभिन्न कार्यक्रमों में यही दृष्टिकोण कई रूपों में दिखाई दिया।

शिक्षा से बदलेगा भविष्य

• विद्यार्थियों से संवाद

• बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का संदेश

• अनुशासन, परिश्रम और आत्मविश्वास पर जोर

• शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया।

रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान शिक्षा को परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बताया गया। संदेश स्पष्ट था— परिस्थितियां सीमित हो सकती हैं, लेकिन अवसर और संकल्प भविष्य तय करते हैं।

विष्णु सुशासन का जमीनी मॉडल

• योजनाओं की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच

• विभागीय समन्वय पर जोर

• जनसंवाद आधारित प्रशासन

• विकास और विश्वास दोनों पर समान ध्यान

नारायणपुर में हुए विभिन्न कार्यक्रमों में यह प्रयास दिखाई दिया कि शासन केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर सीधे नागरिकों के बीच उपस्थित हो।

 पुनर्वास: हिंसा से मुख्यधारा तक

• आत्मसमर्पित महिलाओं से संवाद

• कौशल विकास और रोजगार

• सम्मानजनक जीवन की ओर पहल

• सामाजिक पुनर्स्थापना पर बल

नक्सल पुनर्वास केंद्र का दौरा इस पूरे प्रवास का महत्वपूर्ण आयाम रहा। संवाद का उद्देश्य केवल पुनर्वास योजनाओं की समीक्षा नहीं बल्कि यह संदेश देना भी था कि समाज की मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए अवसर और सम्मान दोनों उपलब्ध होने चाहिए।

महिला शक्ति से आत्मनिर्भरता

• महतारी सम्मेलन

• स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा

• आर्थिक भागीदारी

• ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका

कुरुषनार में आयोजित कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण अब सामाजिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आर्थिक परिवर्तन की प्रमुख धुरी बन रहा है।

 समावेशी विकास की दिशा

*दिव्यांग विद्यार्थियों से संवाद

*शिक्षा और अवसर पर समान जोर

*महिला सुरक्षा सेवाओं की समीक्षा

*संवेदनशील शासन व्यवस्था

दिव्यांग आवासीय विद्यालय और सखी वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण ने यह संकेत दिया कि विकास की परिभाषा में संवेदनशीलता और समावेशिता दोनों को महत्व दिया जा रहा है।

नारायणपुर की यह यात्रा केवल कार्यक्रमों का क्रम नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करती है। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पुनर्वास, सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास यदि निरंतर बना रहता है, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र केवल अपने अतीत से नहीं बल्कि परिवर्तन और सुशासन के नए मॉडल से पहचाना जा सकता है।