छत्तीसगढ़ का छिपा स्वर्ग रानीदाह,जहां झरनों की गूंज, जंगलों की खुशबू और इतिहास की रहस्यमयी कहानी करती है आपका स्वागत : जशपुर की वादियों में बसा रानीदाह जलप्रपात बन रहा प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों और एडवेंचर प्रेमियों की पहली पसंद
(विशेष लेख : श्रीमती नूतन सिदार,जिला जनसंपर्क अधिकारी, जशपुर)
जशपुर । छत्तीसगढ़ के उत्तरी अंचल में स्थित जशपुर जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ियों और जलप्रपातों के कारण प्रदेश का पर्यटन मुकुट माना जाता है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों में एक है रानीदाह जलप्रपात, जो अपनी अनुपम सुंदरता, रहस्यमयी इतिहास और शांत वातावरण के कारण आज प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रानीदाह जलप्रपात घने साल के जंगलों और हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित है। यहां तक पहुंचने वाली घुमावदार और खूबसूरत सड़कें स्वयं में एक यादगार यात्रा का अनुभव कराती हैं। जैसे-जैसे पर्यटक इस स्थल के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे प्रकृति का सौंदर्य अपने अलग-अलग रूपों में उनका स्वागत करता है।
ऊंची चट्टानों से गिरती दूधिया जलधाराएं, आसपास फैली हरियाली, पक्षियों का मधुर कलरव और जंगलों की ताजगी यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देती है। विशेष रूप से वर्षा ऋतु में रानीदाह अपने सबसे आकर्षक स्वरूप में दिखाई देता है, जब जलप्रवाह कई धाराओं में विभाजित होकर ऊंची चट्टानों से नीचे गिरता है और एक अद्भुत दृश्य निर्मित करता है।
रानीदाह केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह लोककथाओं और ऐतिहासिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, ओडिशा की राजकुमारी रानी शिरोमणि किसी कारणवश जशपुर की इन पहाड़ियों तक पहुंचीं। जब उनके पिता और पांच भाई उनका पीछा करते हुए यहां पहुंचे, तब उन्होंने अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगा दी। तभी से यह स्थान "रानीदाह" के नाम से प्रसिद्ध हो गया, जिसका अर्थ है – रानी का जलप्रपात।
झरने के समीप स्थित कुछ चट्टानों को आज भी स्थानीय लोग "पांच भैया" के नाम से जानते हैं, जो रानी के पांच भाइयों के प्रतीक माने जाते हैं। यह लोककथा इस स्थल को एक रहस्यमयी, ऐतिहासिक और भावनात्मक पहचान प्रदान करती है।
रानीदाह आज पर्यटन की दृष्टि से तेजी से उभरता हुआ स्थल बन रहा है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ-साथ पिकनिक, फोटोग्राफी, प्रकृति अवलोकन और शांति के क्षणों का अनुभव करते हैं। सुबह और शाम का समय यहां विशेष रूप से आकर्षक होता है, जब सूर्य की किरणें झरने की फुहारों के बीच इंद्रधनुषी दृश्य उत्पन्न करती हैं।
जशपुर जिला प्रशासन एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच रानीदाह जैसे स्थलों की पहचान लगातार राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है। यदि कोई व्यक्ति प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहता है, शहरों की भागदौड़ से दूर शांति और रोमांच का अनुभव करना चाहता है, तो रानीदाह उसके लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है।
निस्संदेह, रानीदाह केवल एक जलप्रपात नहीं, बल्कि प्रकृति, इतिहास, लोकविश्वास और पर्यटन का अद्भुत संगम है। जशपुर आने वाला हर पर्यटक यदि एक बार रानीदाह की वादियों में पहुंच जाए, तो वह इस प्राकृतिक धरोहर की सुंदरता और इसकी अनूठी कहानी को जीवनभर नहीं भूल पाएगा।

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