अयोध्या की गूंज, कालिदास की धरती और सरगुजा की सांस्कृतिक चेतना का महाकुंभ : रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, आषाढ़ के प्रथम दिवस पर इतिहास, संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम, समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अयोध्या की गूंज, कालिदास की धरती और सरगुजा की सांस्कृतिक चेतना का महाकुंभ : रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, आषाढ़ के प्रथम दिवस पर इतिहास, संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम, समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

सरगुजा। आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर सरगुजा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत एक बार फिर जीवंत हो उठी, जब दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने समारोह का उद्घाटन करते हुए रामगढ़ को केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का केंद्र बताया।

पारंपरिक गरिमा, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक वैभव से ओतप्रोत इस आयोजन में हजारों लोगों की उपस्थिति ने रामगढ़ की सांस्कृतिक महत्ता को नई ऊर्जा प्रदान की। उद्घाटन अवसर पर स्कूली बच्चों, स्थानीय कलाकारों और देश के विभिन्न हिस्सों से आए सांस्कृतिक दलों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक पहचान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव इतिहास, पुरातत्व, साहित्य, लोकसंस्कृति और पर्यटन का ऐसा संगम है, जो नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

उन्होंने रामगढ़ महोत्सव के 50 वर्ष पूर्ण होने पर सभी नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि रामगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।

महोत्सव के दौरान विश्व की प्राचीनतम रंगशालाओं में शामिल सीताबेंगरा गुफा, ऐतिहासिक जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला तथा अन्य पुरातात्विक स्थलों के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इतिहास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ इन स्थलों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से आगंतुकों को अवगत करा रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और विरासत को बेहतर ढंग से समझ सके।

सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि रामगढ़ भारतीय सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास काल के दौरान यहां समय व्यतीत किया था। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास की काव्य प्रेरणा से भी इस क्षेत्र का गहरा संबंध माना जाता है। सीताबेंगरा, जोगीमारा, राम-जानकी मंदिर और हाथीपोल जैसे स्थल विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान बनाने की क्षमता रखते हैं।

लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि रामगढ़ धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास, साहित्य और संस्कृति की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। इसकी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण हैं।

कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने बताया कि आयोजन में स्थानीय कलाकारों, लोककलाओं और पारंपरिक संस्कृति को विशेष स्थान दिया गया है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ ने मोहा मन

रामगढ़ महोत्सव के प्रथम दिवस में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को जीवंत कर दिया। प्रभावशाली अभिनय, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की छात्राओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित भावपूर्ण नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उत्कृष्ट अभिनय, संवेदनशील अभिव्यक्ति और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा।

कवि सम्मेलन भी महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा। ओज, वीर, हास्य-व्यंग्य, श्रृंगार और समसामयिक विषयों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया।

इसके अलावा सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, लोकगीत, स्वागत गीत और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक परंपराओं और जनजातीय संस्कृति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य आयोजन ने इस उद्देश्य को पूरी तरह सार्थक किया।

महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।