आपातकाल से किसानों तक,कांग्रेस पर मंत्री केदार कश्यप का बड़ा हमला : बोले- लोकतंत्र का गला घोंटने वाले आज लोकतंत्र बचाने की बात कर रहे,मुद्दाविहीन कांग्रेस भ्रम फैलाने में जुटी; किसानों, स्वास्थ्य और सुशासन पर गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आपातकाल, लोकतंत्र और किसानों के मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है। राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने, किसानों को भ्रमित करने और स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र का गला घोंटा, वही पार्टी आज लोकतंत्र की दुहाई दे रही है।
केदार कश्यप ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और नई पीढ़ी को यह जानने का अधिकार है कि वर्ष 1975 में कांग्रेस सरकार ने देश पर आपातकाल थोपकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। उस दौर में हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद किया गया और असहमति की आवाजों को दबाया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल संविधान की पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं की मजबूती से जुड़ा हुआ है। नई पीढ़ी को लोकतंत्र के संघर्ष और उसकी रक्षा के महत्व को समझना होगा।
कांग्रेस पर "मुद्दाविहीन राजनीति" का आरोप
वन मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए वह निराधार आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी के सहारे भ्रम की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक भूमिका निभाने के बजाय केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहा है।
किसानों के लिए फसल परिवर्तन योजना का उल्लेख
कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने बताया कि दलहन और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल प्रोत्साहन राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि इन फसलों की खरीद और विपणन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है ताकि किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर कांग्रेस को घेरा
स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए केदार कश्यप ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था अव्यवस्थाओं और विवादों से घिरी रही। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वय से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है तथा आम नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने, सुविधाओं के विस्तार और आम जनता तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है।
नीट परीक्षा पर सरकार संवेदनशील
नीट परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर और संवेदनशील है। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
"जनता अब काम के आधार पर फैसला कर रही"
केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस का राजनीतिक इतिहास लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का रहा है, जबकि वर्तमान राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता, किसानों के कल्याण और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि अब जनता राजनीतिक आरोपों के बजाय सरकारों के कामकाज और परिणामों के आधार पर निर्णय ले रही है, इसलिए कांग्रेस के आरोपों का कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है।
केदार कश्यप के बड़े बयान
"लोकतंत्र का गला घोंटने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र की बात कर रही है।"
"कांग्रेस के पास जनता से जुड़े कोई मुद्दे नहीं बचे हैं।"
"फसल परिवर्तन के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 15 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।"
"स्वास्थ्य सेवाओं पर कांग्रेस को बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।"
"सरकार नीट परीक्षा की पारदर्शिता और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।"

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