शिक्षक नेताओं पर प्रदेश अध्यक्ष एवं फेडरेशन संस्थापक जाकेश साहू का सीधा हमला : शिक्षकों की दुर्दशा के लिए संगठन जिम्मेदार,खोला मोर्चा : वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन, ऑनलाइन बोझ, वीएसके और तुगलकी आदेशों पर सरकार के साथ शिक्षक संगठनों को भी घेरा

शिक्षक नेताओं पर प्रदेश अध्यक्ष एवं फेडरेशन संस्थापक जाकेश साहू का सीधा हमला : शिक्षकों की दुर्दशा के लिए संगठन जिम्मेदार,खोला मोर्चा : वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन, ऑनलाइन बोझ, वीएसके और तुगलकी आदेशों पर सरकार के साथ शिक्षक संगठनों को भी घेरा

"जब तक शिक्षक संगठन एक नहीं होंगे, तब तक शिक्षकों की समस्याएं फाइलों और व्हाट्सएप संदेशों में ही रहेंगी दबी"

रायपुर। शिक्षा विभाग की बढ़ती समस्याओं, लगातार जारी हो रहे नए आदेशों, ऑनलाइन कार्यों के बढ़ते दबाव और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू ने प्रदेश के शिक्षक संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की वर्तमान दुर्दशा के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठन और उनके नेता भी समान रूप से जिम्मेदार हैं।

जाकेश साहू ने कहा कि वेतन विसंगति, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना, पुरानी पेंशन, क्रमोन्नति वेतनमान, युक्तियुक्तकरण की पीड़ा, विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके), ऑनलाइन कार्यों की भरमार और मोबाइल आधारित शासकीय एप्स के दबाव जैसी समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं, लेकिन शिक्षक संगठन एकजुट होकर प्रभावी लड़ाई नहीं लड़ पाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग को प्रयोगशाला बना दिया गया है और लगातार नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं। व्हाट्सएप और ऑनलाइन सिस्टम के आने के बाद शिक्षकों पर दिनभर विभागीय संदेशों और रिपोर्टिंग का दबाव बढ़ गया है। राज्य स्तर से जिला, विकासखंड, संकुल और स्कूल तक पहुंचने वाले आदेशों में तत्काल जानकारी भेजने का दबाव रहता है।

'शिक्षक नहीं, डाटा एंट्री ऑपरेटर बन गए हैं शिक्षक'

जाकेश साहू ने कहा कि शिक्षक अब शिक्षण कार्य से अधिक ऑनलाइन रिपोर्टिंग, डाटा एंट्री और मोबाइल आधारित कार्यों में व्यस्त हैं। यदि विभागीय डाक और ऑनलाइन कार्य समय पर नहीं किए जाते तो नोटिस, निलंबन और कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। इससे शिक्षक बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

वीएसके एप पर भी उठाए सवाल

उन्होंने विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) एप को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या है। शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज करने के लिए नेटवर्क की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

भीषण गर्मी में स्कूल संचालन पर नाराजगी

जाकेश साहू ने कहा कि भीषण गर्मी और उमस के बावजूद 16 जून से स्कूल संचालन शुरू कर दिया गया। कई क्षेत्रों में छात्र और शिक्षक दोनों ही गर्मी से परेशान हैं तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।

संगठनों की आपसी लड़ाई से नुकसान

उन्होंने कहा कि प्रदेश के शिक्षक संगठन कई हिस्सों में बंटे हुए हैं और हर संगठन अपनी अलग नेतागिरी में लगा हुआ है। यही कारण है कि सरकार पर सामूहिक दबाव नहीं बन पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता स्वयं को बड़ा और दूसरे संगठनों को छोटा साबित करने में लगे हैं, जिसका खामियाजा आम शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।

एक मंच पर आने की अपील

जाकेश साहू ने कहा कि यदि प्रदेश के सभी शिक्षक संगठन एक साझा मंच बनाकर आंदोलन करें तो सरकार पर दबाव बनेगा और अव्यावहारिक आदेशों की समीक्षा होगी। उन्होंने दावा किया कि यदि संयुक्त आंदोलन होता है तो प्रदेश का आम शिक्षक निश्चित रूप से उसके साथ खड़ा होगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की लड़ाई व्यक्तिगत नेतृत्व या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है।

जाकेश साहू के प्रमुख आरोप

शिक्षक संगठनों की बिखरी हुई ताकत से सरकार को फायदा।

शिक्षक पढ़ाने से ज्यादा ऑनलाइन कार्यों में व्यस्त।

वीएसके और मोबाइल आधारित व्यवस्था से बढ़ा दबाव।

वेतन विसंगति और पुरानी पेंशन जैसे मुद्दे लंबित।

भीषण गर्मी में स्कूल संचालन पर सवाल।

संयुक्त आंदोलन ही समस्याओं का समाधान।