दोकड़ा धाम में आज गूंजेगा आस्था का महासागर : 108 कलशों से होगा जगन्नाथ महाभिषेक, हजारों श्रद्धालुओं को मिलेगा गजानन वेश का दुर्लभ दर्शन,स्नान पूर्णिमा पर दोकड़ा धाम बनेगा भक्ति का महाकुंभ,भगवान जगन्नाथ के दिव्य महारण स्नान महोत्सव की तैयारियां पूरी
दोकड़ा (जशपुर)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले स्थित ऐतिहासिक दोकड़ा धाम आज स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था, भक्ति और सनातन परंपरा के विराट उत्सव का साक्षी बनेगा। श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का दिव्य महारण स्नान महोत्सव श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
महोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण 108 पवित्र कलशों के सुगंधित एवं पवित्र जल से भगवान का महाभिषेक होगा। वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन और शंखध्वनि के बीच होने वाला यह दिव्य स्नान अनुष्ठान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर करेगा।
स्नान अनुष्ठान के पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को विशेष गजानन (हाथी) वेश में अलंकृत किया जाएगा। यह स्वरूप अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और वर्ष में केवल स्नान पूर्णिमा के अवसर पर ही श्रद्धालुओं को इसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।
मंदिर समिति के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 1 बजे मंगल आरती एवं हरि कीर्तन से होगी। इसके बाद पहंडी विजय, 108 कलशों से देव स्नान, दिव्य श्रृंगार एवं गजानन वेश दर्शन तथा संध्या आरती एवं महाप्रसाद वितरण के साथ धार्मिक आयोजन संपन्न होगा।
दोकड़ा धाम में आयोजित होने वाला यह उत्सव अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान के रूप में उभर रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
मंदिर समिति ने प्रदेश एवं आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य महोत्सव में शामिल होने और भगवान जगन्नाथ के श्रीचरणों में आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।
क्या है स्नान पूर्णिमा का महत्व?
जगन्नाथ परंपरा में स्नान पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस दिव्य स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और कुछ दिनों तक श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं देते। इसके पश्चात आषाढ़ मास में विश्वविख्यात रथयात्रा का आयोजन होता है।
राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा दोकड़ा धाम
जशपुर अंचल का दोकड़ा धाम अपनी धार्मिक परंपराओं, जगन्नाथ संस्कृति और जनआस्था के कारण लगातार पहचान बना रहा है। स्नान पूर्णिमा और रथयात्रा जैसे आयोजनों ने इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल कर दिया है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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