"नशे से मैदान तक का सफर,जशपुर ने दिखाया पुनर्वास का नया रास्ता : मैदान में लौट रही जिंदगी,कबड्डी, खो-खो और बैडमिंटन से नशे की गिरफ्त से बाहर आ रहे युवा"
जशपुर का नशा मुक्ति केंद्र बना देश के लिए मिसाल, खेलों के जरिए हो रहा मानसिक और सामाजिक पुनर्वास
जशपुर। देशभर में बढ़ती नशे की समस्या के बीच छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक मॉडल सामने आया है। यहां नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में इलाज के साथ-साथ खेलों को पुनर्वास का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया है। कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन और अन्य आउटडोर खेलों के जरिए नशे की लत से जूझ रहे लोगों को नई जिंदगी देने की कोशिश की जा रही है।
कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी डॉ. लाल उमेंद सिंह के निर्देश पर नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र जशपुर में नियमित रूप से खेल गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त से बाहर निकल रहे लोगों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का विकास करना है।
केंद्र संचालकों के अनुसार, खेलों में भाग लेने वाले हितग्राहियों के व्यवहार, मानसिक स्थिति और शारीरिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। सामूहिक खेलों से उनमें टीम भावना विकसित हो रही है, तनाव कम हो रहा है तथा वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेल व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच, प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना और आत्मनियंत्रण विकसित करते हैं। यही कारण है कि विश्व स्तर पर भी पुनर्वास केंद्रों में खेल और योग को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
जशपुर का नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र पिछले दो वर्षों से संचालित हो रहा है। यहां निःशुल्क आवास, भोजन, योग, काउंसलिंग, मनोरंजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र भागलपुर रोड स्थित रणजीता स्टेडियम के पीछे संचालित है।
समाज कल्याण विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके परिवार या आसपास कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा हो तो उसे नशा मुक्ति केंद्र से जोड़कर पुनर्वास का अवसर दें। केंद्र अधीक्षक नंद कुमार सिंह से मोबाइल नंबर 8103110460 पर संपर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि खेल, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण से भी जीती जा सकती है। जशपुर का यह मॉडल आज देश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है।
खेल बना इलाज का नया हथियार
कबड्डी और खो-खो से बढ़ रहा आत्मविश्वास
बैडमिंटन से मिल रही शारीरिक सक्रियता
योग और काउंसलिंग से कम हो रहा मानसिक तनाव
टीम गेम्स से विकसित हो रही सामाजिक सहभागिता
नशे से बाहर आकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हितग्राही

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