एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में 689 विद्यार्थियों को मिली डिग्री: उपराष्ट्रपति बोले- अब स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी
रायपुर। एम्स रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत केवल उत्सव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का अवसर है।
आज विद्यार्थियों को डिग्री मिल रही है, लेकिन कल उन्हें इससे भी बड़ी जिम्मेदारी—लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन—की जिम्मेदारी संभालनी होगी। समारोह में कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाण-पत्र दिए गए। इनमें 376 महिलाएं और 313 पुरुष शामिल हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को पुरस्कार और स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद एम्स रायपुर ने छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और उग्रवाद जैसी चुनौतियों के बावजूद राज्य अब विकास और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एम्स रायपुर को उन्होंने इस बदलाव का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।
किडनी और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की उपलब्धि
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर में हुए पहले किडनी ट्रांसप्लांट, 95% से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल और कान प्रत्यारोपण की उपलब्धियों की सराहना की। हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि डॉक्टर बनने के लिए ज्ञान और कौशल के साथ धैर्य, करुणा और जिम्मेदारी जरूरी है। केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने युवा डॉक्टरों से नैतिकता, शोध, निवारक स्वास्थ्य और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
समारोह में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विद्यार्थियों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई गई।

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