बदलते सुकमा की नई तस्वीर : बच्चों के बीच बैठीं मंत्री,महिलाओं के स्वावलंबन और पुनर्वास व्यवस्थाओं का किया जमीनी निरीक्षण,मंत्री का सुकमा दौरा बना संवेदनशील शासन और बदलते बस्तर का प्रतीक
(संपादकीय : प्रशांत सहाय की कलम से)
जब मंत्री बच्चों के बीच बैठकर एबीसीडी पढ़ें, तब बदलते बस्तर की तस्वीर दिखाई देती है
एक समय था जब सुकमा का नाम देशभर में केवल नक्सल हिंसा, भय और असुरक्षा के प्रतीक के रूप में लिया जाता था। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का गांवों तक पहुंचना चुनौती माना जाता था। लेकिन आज वही सुकमा बदलते बस्तर की नई कहानी लिख रहा है, जहां राज्य की मंत्री बच्चों के बीच फर्श पर बैठकर एबीसीडी सुनती हैं, महिलाओं के स्वावलंबन केंद्रों का निरीक्षण करती हैं और आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास केंद्र में जाकर उनके भविष्य की चिंता करती हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का सुकमा दौरा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह उस विश्वास की पुनर्स्थापना है जिसमें सरकार, समाज और संवेदनशील प्रशासन एक साथ खड़े दिखाई देते हैं। कभी घोर नक्सल प्रभावित माने जाने वाले इलाकों में आज जनप्रतिनिधियों का सहज पहुंचना यह दर्शाता है कि भय और हिंसा का वातावरण धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है और विकास, विश्वास तथा संवेदना की नई धारा मजबूत हो रही है।

आंगनबाड़ी, एनआरसी, इमली प्रसंस्करण केंद्र और नक्सल पुनर्वास केंद्र का किया निरीक्षण, अधिकारियों को गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के दिए निर्देश
कभी नक्सल हिंसा और असुरक्षा की पहचान रहे सुकमा जिले में आज विकास, विश्वास और संवेदनशील प्रशासन की नई तस्वीर उभर रही है। महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का एक दिवसीय सुकमा प्रवास इसी बदलाव का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया, जहां उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर शिक्षा की गुणवत्ता परखी, महिलाओं की आजीविका गतिविधियों को देखा और आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास केंद्र पहुंचकर उनके भविष्य की चिंता की।
मंत्री राजवाड़े ने अपने दौरे की शुरुआत रोकेल स्थित आंगनबाड़ी केंद्र और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) से की। यहां उन्होंने बच्चों के साथ फर्श पर बैठकर आत्मीय संवाद किया, उनसे एबीसीडी और पहाड़े सुने तथा उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। बच्चों को फल और चॉकलेट वितरित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण पोषण, शिक्षा और बेहतर सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों के समग्र विकास से जुड़ी योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। एनआरसी में कुपोषित बच्चों की देखभाल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को केंद्र तक लाने पर विशेष जोर दिया गया।
महिला स्वावलंबन का मॉडल बना इमली प्रसंस्करण केंद्र
कुम्हाररास स्थित इमली प्रसंस्करण केंद्र के निरीक्षण के दौरान मंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद किया। जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि केंद्र में लगभग 60 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध हुआ है और इमली से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
मंत्री ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बताते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियां ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। उन्होंने उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
पुनर्वास केंद्र पहुंचकर युवाओं का बढ़ाया मनोबल
दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव नक्सल पुनर्वास केंद्र रहा, जहां मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आत्मसमर्पित युवाओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने युवाओं की आवास, भोजन, प्रशिक्षण और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा कहा कि राज्य सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस दौरान 36 प्रशिक्षणार्थियों को वेलकम किट वितरित की गई। मंत्री ने युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नए जीवन की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

बदलते बस्तर का प्रतीक बना यह दौरा
एक समय जिस सुकमा में जनप्रतिनिधियों की आवाजाही सुरक्षा कारणों से बड़ी चुनौती मानी जाती थी, वहां आज मंत्री का गांव-गांव पहुंचना और आम लोगों के बीच सहज संवाद करना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। यह केवल सुरक्षा के मोर्चे पर सफलता नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और जनसरोकारों की पुनर्स्थापना का संकेत भी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा, पोषण, महिला स्वावलंबन और पुनर्वास जैसी योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास का आधार बन सकता है। मंत्री राजवाड़े का यह दौरा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
दौरे के दौरान कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर सहित विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशीलता, पारदर्शिता और निरंतर निगरानी के साथ पहुंचाया जाए।
बदलते बस्तर का संदेश
कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित इलाकों में अब जनप्रतिनिधियों की सहज पहुंच
बच्चों, महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद
महिला स्वावलंबन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास पर विशेष फोकस
विकास और विश्वास की नई कहानी लिख रहा है सुकमा
यह दौरा केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस नए बस्तर का प्रतीक है, जहां भय की जगह विश्वास और हिंसा की जगह विकास की चर्चा हो रही है।

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