बरसात में होने वाली बीमारियों को लेकर देशभर में अलर्ट,जशपुर मॉडल से स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी तैयारी : जलजनित और मच्छरजनित रोगों पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, स्वच्छ पानी, सतर्कता और जनभागीदारी पर जोर

बरसात में होने वाली बीमारियों को लेकर देशभर में अलर्ट,जशपुर मॉडल से स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी तैयारी : जलजनित और मच्छरजनित रोगों पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, स्वच्छ पानी, सतर्कता और जनभागीदारी पर जोर

जशपुर।

मानसून की दस्तक के साथ देश के कई हिस्सों में जलजनित एवं मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही व्यापक तैयारियां देश के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बरसाती मौसम में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम, त्वरित उपचार और जन-जागरूकता को लेकर विशेष अभियान शुरू किया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में दूषित पानी और मच्छरों के कारण डायरिया, उल्टी-दस्त, मलेरिया, डेंगू, पीलिया तथा अन्य संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों, ओआरएस, क्लोरीन टैबलेट, एंटीबायोटिक्स तथा अन्य चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों और दूरस्थ गांवों की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी बीमारी के प्रकोप की स्थिति में तत्काल नियंत्रणात्मक कदम उठाए जा सकें।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से केवल स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने की अपील की है। पानी को उबालकर या क्लोरीनयुक्त कर ही पीने, जल स्रोतों की नियमित सफाई करने तथा घरों के आसपास जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी गई है। बरसात के मौसम में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और बासी भोजन से बचने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

मलेरिया, डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए मच्छरदानी का उपयोग, पूरी बांह के कपड़े पहनना तथा कूलर, गमले, पानी की टंकियों और पुराने टायरों में जमा पानी को नियमित रूप से खाली करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बुखार, दस्त, उल्टी, पेट दर्द, कमजोरी, सिरदर्द, शरीर दर्द या पीलिया जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों में दस्त की स्थिति में ओआरएस और जिंक का उपयोग अत्यंत लाभकारी माना गया है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं, मितानिनों तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और रोग नियंत्रण गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी स्थापित किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और बढ़ती संक्रामक बीमारियों के दौर में जनभागीदारी, सतर्कता और समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव है। जशपुर में चल रहा यह अभियान देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है।