15 हजार रुपये प्रति एकड़ का बोनस, कम बारिश में किसानों के लिए बड़ा सहारा एल-नीनो की चुनौती के बीच किसानों के लिए सरकार का बड़ा प्रोत्साहन, दलहन-तिलहन बोने पर मिलेंगे 15 हजार रुपये प्रति एकड़

15 हजार रुपये प्रति एकड़ का बोनस, कम बारिश में किसानों के लिए बड़ा सहारा एल-नीनो की चुनौती के बीच किसानों के लिए सरकार का बड़ा प्रोत्साहन, दलहन-तिलहन बोने पर मिलेंगे 15 हजार रुपये प्रति एकड़

जशपुरनगर, 26 जून 2026। जिले में संभावित कम वर्षा और एल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विभाग ने विशेष रूप से टिकरा (अपलैंड) भूमि में धान के बजाय दलहन और तिलहन फसलों की खेती अपनाने की अपील की है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को शासन की ओर से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

उप संचालक कृषि, जशपुर ने बताया कि इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को कम पानी में अच्छी उपज देने वाली फसलों की ओर रुख करना चाहिए। अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी, रागी, मूंगफली, तिल, रामतिल और कुल्थी जैसी फसलें कम वर्षा की स्थिति में बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।

15 हजार रुपये प्रति एकड़ का विशेष प्रोत्साहन

कृषि विभाग के अनुसार टिकरा भूमि में धान की जगह दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह योजना किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ कम बारिश की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करेगी।

इसके अलावा इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

कम लागत, अधिक लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार दलहन और तिलहन फसलें कम लागत में अच्छी पैदावार देती हैं तथा मृदा की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। इन फसलों से भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे अगली फसलों को भी लाभ मिलता है। बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।

अल्प अवधि वाली धान किस्मों की सलाह

कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले किसानों को कम अवधि में पकने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे कम वर्षा की स्थिति में भी फसल का जोखिम कम होगा और उत्पादन प्रभावित होने की संभावना घटेगी।

उप संचालक कृषि ने किसानों से मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक सलाह अपनाने और शासन की प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने की अपील की है, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सके।