अल्प वर्षा से निपटने का छत्तीसगढ़ मॉडल तैयार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मेगा एक्शन प्लान, 46 हजार टन अतिरिक्त DAP, 125 दिन रोजगार और जल संरक्षण पर बड़ा फोकस

अल्प वर्षा से निपटने का छत्तीसगढ़ मॉडल तैयार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मेगा एक्शन प्लान, 46 हजार टन अतिरिक्त DAP, 125 दिन रोजगार और जल संरक्षण पर बड़ा फोकस

खरीफ-2026 को लेकर हाईलेवल समीक्षा, किसानों को खाद-बीज, सिंचाई और वैज्ञानिक खेती की पूरी गारंटी; जल संकट से निपटने के लिए 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान और वीबी-जी राम जी योजना को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर । देश के कई हिस्सों में मानसून की अनिश्चितता और संभावित अल्प वर्षा की आशंकाओं के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ-2026 को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में कृषि विभाग और विकसित भारत–वीबी-जी राम जी योजना की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर स्पष्ट किया कि "किसानों के हित सर्वोच्च हैं और किसी भी परिस्थिति में खाद, बीज, सिंचाई या तकनीकी सहायता की कमी नहीं होने दी जाएगी।"

बैठक में संभावित अल्प वर्षा, उर्वरकों की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, मौसम पूर्वानुमान और ग्रामीण रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को समन्वित ढंग से कार्य करते हुए जिला-स्तर पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए।

46 हजार टन से अधिक अतिरिक्त DAP से किसानों को बड़ी राहत

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति मिली है, जो सामान्य आवंटन से अधिक है।

उन्होंने कहा कि इससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा और खेती प्रभावित नहीं होगी। साथ ही अधिकारियों को अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

वैज्ञानिक खेती और कम अवधि वाली फसलों पर जोर

मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए।उन्होंने उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया, ताकि किसानों की आय बढ़े और मौसम संबंधी जोखिम कम हो।

जल संरक्षण बनेगा सबसे बड़ा हथियार

संभावित अल्प वर्षा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान को जनभागीदारी का अभियान बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण और भूजल संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण में किया गया हर प्रयास भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और कृषि को स्थायी आधार प्रदान करेगा।

वीबी-जी राम जी योजना से मिलेगा 125 दिन रोजगार

बैठक में बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत–वीबी-जी राम जी योजना का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है।योजना के तहत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा और मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। योजना के माध्यम से जल संरक्षण, जल संरचनाओं का निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस योजना को ग्रामीण रोजगार और जल सुरक्षा दोनों का मजबूत माध्यम बनाया जाए।

मौसम एप से किसानों तक पहुंचेगी समय पर चेतावनी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 'सचेत', 'दामिनी' और 'मेघदूत' जैसे मौसम आधारित मोबाइल एप का व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि किसानों को आकाशीय बिजली, वर्षा और मौसम संबंधी समय पर सटीक जानकारी मिल सके।उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय के बुलेटिनों का भी सोशल मीडिया और पारंपरिक माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राज्य सरकार का संदेश—किसान निश्चिंत रहें

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार कृषि उत्पादन, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने किसानों से अपील की कि खेती से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या या सलाह के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें तथा वैज्ञानिक खेती अपनाकर बदलते मौसम की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करें।