जशपुर में बन रहा देश का स्मार्ट सिंचाई मॉडल : कलेक्टर रोहित व्यास ने 119 करोड़ की एम-कैड परियोजना का किया निरीक्षण, आधुनिक तकनीक से बदलेगी 13 गांवों की खेती

जशपुर में बन रहा देश का स्मार्ट सिंचाई मॉडल : कलेक्टर रोहित व्यास ने 119 करोड़ की एम-कैड परियोजना का किया निरीक्षण, आधुनिक तकनीक से बदलेगी 13 गांवों की खेती

17 किमी अंडरग्राउंड पाइपलाइन पूरी, सौर ऊर्जा, IoT और SCADA आधारित जल प्रबंधन से 4,933 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित; देश के 23 राज्यों की 34 परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का एकमात्र बगिया क्लस्टर शामिल

जशपुरनगर । छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजना आकार ले रही है, जो भविष्य में देश के लिए स्मार्ट सिंचाई मॉडल बन सकती है। कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्षेत्र में भारत सरकार की सहायता से विकसित की जा रही समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) परियोजना का गुरुवार को कलेक्टर रोहित व्यास ने निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

करीब 119 करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब तक 17 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जबकि पंप हाउस निर्माण के लिए ले-आउट और खुदाई का कार्य भी शुरू हो गया है। यह परियोजना मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना से संचालित होगी।

कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि परियोजना में नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता और कृषि उत्पादकता में व्यापक सुधार होगा। उन्होंने कहा कि यह योजना आने वाले समय में देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध हो सकती है।

देश के चुनिंदा क्लस्टरों में शामिल जशपुर

एम-कैड योजना के अंतर्गत देशभर के 23 राज्यों में 34 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। इस परियोजना के लिए भारत सरकार ने 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

सौर ऊर्जा और स्मार्ट तकनीक से होगी सिंचाई

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक नहरों के बजाय प्रेशराइज्ड अंडरग्राउंड पाइप नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी, भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी और हर खेत तक नियंत्रित तरीके से पानी पहुंचेगा।

परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) तथा IoT (Internet of Things) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डेटा आधारित प्रणाली तय करेगी कि किस खेत में, कब और कितनी मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाए।

13 गांवों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

इस योजना से बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड और ढुढुडांड सहित 13 गांवों की लगभग 4,933 हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रित सिंचाई, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि पद्धतियों के समन्वय से किसानों की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में भी मदद मिलेगी।

कृषि के भविष्य की नई तस्वीर

एम-कैड परियोजना केवल सिंचाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल प्रबंधन, डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और किसान सहभागिता को एकीकृत करने वाला मॉडल है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो जशपुर का बगिया क्लस्टर देश में आधुनिक, टिकाऊ और तकनीक आधारित कृषि विकास का नया उदाहरण बन सकता है।