'सहकार से समृद्धि' को मिली नई उड़ान: 162 करोड़ की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि जारी, 1352 नई सहकारी समितियों के साथ छत्तीसगढ़ बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया मॉडल

'सहकार से समृद्धि' को मिली नई उड़ान: 162 करोड़ की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि जारी, 1352 नई सहकारी समितियों के साथ छत्तीसगढ़ बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया मॉडल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले—सहकारिता ही किसानों की आय बढ़ाने और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव; बिना ब्याज 8 हजार करोड़ का कृषि ऋण, दुग्ध, वनोपज, मत्स्य और महिला समूहों को भी मिलेगा बड़ा सहारा

रायपुर । ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने सहकारिता को विकास का सबसे बड़ा आधार बनाने का संकल्प दोहराया है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि "सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है।"

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ किया। साथ ही उत्कृष्ट सहकारी समितियों को 'सहकार प्रेरणा पुरस्कार' से सम्मानित किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया और किसानों के लिए कई नई पहल की शुरुआत की।

1352 नई सहकारी समितियों से गांव-गांव तक पहुंचा सहकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पिछले दो वर्षों के दौरान 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है, ताकि कोई भी पंचायत सहकारिता व्यवस्था से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण युवाओं को संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

उन्होंने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिससे किसानों का पंजीयन अब पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होगा।

बिना ब्याज 8 हजार करोड़ का कृषि ऋण, किसानों को बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि एक समय किसानों को खेती के लिए 16 से 18 प्रतिशत ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था, लेकिन आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे खेती के लिए वित्तीय संसाधन आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।

सिर्फ खेती नहीं, दुग्ध, वनोपज और मत्स्य पालन भी बनेगा आय का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता का दायरा केवल कृषि तक सीमित नहीं रहा है। अब पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी मॉडल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं और सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

162 करोड़ की राशि से लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा सीधा लाभ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया। इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

महिला समूहों, वनधन समितियों और पैक्स को मिला नया संबल

सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया, उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को सम्मानित किया तथा वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया। इसके अलावा पांच नई पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराए गए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का भी लोकार्पण किया गया।

सहकारिता के नवाचारों का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लगाए गए विभिन्न सहकारी संस्थाओं के स्टॉलों का भी अवलोकन किया। इनमें जशपुर की हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति, कोरबा की महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, नाफेड, इफको, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ सहित अनेक संस्थाओं ने अपने नवाचार और उत्पाद प्रदर्शित किए।

ग्रामीण विकास का नया विजन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सहकारिता आंदोलन किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और वनवासी परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में सहकारी विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा, जहां गांवों की खुशहाली ही राज्य की समृद्धि की सबसे बड़ी पहचान होगी।