CG- बस से सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर : छत्तीसगढ़ में 170 बसें हुई ब्लैकलिस्ट, परिवहन विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप……
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ और नियमों की अनदेखी करने वाले बस ऑपरेटरों के खिलाफ परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने पैनिक बटन और जेपीएस न लगाने के मामले में 170 बसों के परमिट निरस्त कर दिए हैं। इसके साथ ही इन सभी बसों को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है, जिसके बाद अब ये बसें प्रदेश या देश की किसी भी सड़क पर संचालित नहीं हो सकेंगी।
परिवहन विभाग ने बताया कि, लगातार यात्री सुरक्षा को ताक पर रखकर बिना जीपीएस और पैनिक बटन के बसें चल रही है। परिवहन विभाग को लगातार शिकायत मिल रही है। इसको लेकर विभाग ने 3 महीने तक विशेष जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान नियमों का घोर उल्लंघन कर संचालित हो रही कुल 170 बसों को चिन्हित किया गया है। यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इन बस संचालकों के खिलाफ परिवहन विभाग ने कार्रवाई की।
वहीं जिन बसों का परमिट निरस्त किया गया है, उन बसों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इन बसों को संचालित करते पाए जाने पर उन्हें जब्त कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वाहन मालिक पर 10 हजार रूपए का जुर्माना और 6 महीने की सजा दी जाएगी।
बसों में अनिवार्य रूप से वीएलटीडी, पैनिक बटन लगाने का प्रमुख कारण यह भी है कि, बस परमिट के हिसाब से अपनी टाइमिंग में तय रूट पर चल रही है कि नहीं, इसका लाइव लोकेशन परिवहन विभाग के अधिकारियों को मिलता रहता है। कई बस ऑपरेटर परमिट शर्तों का उल्लंघन करने अपनी बसों में वीएलटीडी को बंद कर देते हैं। वीएलटीडी सिर्फ एक डिवाइस नहीं, यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी है।
पिछले साल कवर्धा में हुए एक भीषण बस हादसे के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई थी। बस में जीपीएस न होने के कारण हादसे के बाद पूरे 3 घंटे तक यह पता ही नहीं चल पाया था कि बस आखिर दुर्घटनाग्रस्त होकर कहां गिरी है। अगर उस बस में वीएलटीडी लगा होता, तो मात्र 5 मिनट के भीतर ही बस की सटीक लोकेशन मिल जाती और समय पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सकता था।
सफर के दौरान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गाड़ियों में पैनिक बटन का होना बेहद जरूरी कर दिया गया है। इस बटन की खूबी यह है किए आपात स्थिति में इसे दबाते ही सीधे 112 नंबर पर इमरजेंसी कॉल चली जाती है। इसके साथ ही तुरंत नजदीकी पुलिस थाने और आरटीओ कंट्रोल रूम को बस की लाइव लोकेशन मिल जाती है, जिससे पुलिस और मदद तुरंत मौके पर पहुंच सकती है।
परिवहन विभाग ने कहा कि, प्रदेशभर में जुलाई से सितंबर तक सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों में वीएलटीडी लगाने के लिए मेगा अभियान चलाया गया। उड़नदस्ता टीम और आरटीओ द्वारा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर, अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर बसों को रोककर चेक किया गया। इसी दौरान 412 बसों में जीपीएस लगा ही नहीं था, 210 बसों में जीपीएस लगा था, पर वह बंद था। 85 बसों में पैनिक बटन था, पर काम नहीं कर रहा था।
इस बसों पर विभाग ने चालानी कार्रवाई करते हुए पहले चरण में 300 बसों को 15 दिन की मोहलत देते हुए अंतिम नोटिस जारी किया गया। उनमें से 140 बसों ने तुरंत जीपीएस लगवाकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा लिया, लेकिन 170 बस मालिकों ने नोटिस की अनदेखी की। इसके बाद उन बसों का परमिट रद्द करने की कार्रवाई की गई।
अपर परिवहन आयुक्त डी. रवि शंकर ने बताया कि, परिवहन विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि, पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े सभी वाहन मालिकों और बस संचालकों को मोटर व्हीकल एक्ट और सुरक्षा के तमाम नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। नियमों को ताक पर रखकर वाहन संचालित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिन ऑपरेटरों के परमिट निरस्त किए गए हैं, उन्होंने लगातार परमिट की शर्तों का उल्लंघन किया था।

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